सुबह का हर लम्हा हसीन हो जाता है तुम्हारी प्यारी-सी मुस्कान से, दिल को सुकून मिल जाता है तुम्हारी एक मीठी-सी बात से। यूँ तो रोज़ सूरज निकलता है रोशनी लेकर आसमान से, मगर मेरी सुबह ख़ास हो जाती है तुम्हारे दीदार से। Good Morning
ज़िंदगी में दुख भरा ये मोड़ कैसा आ गया,
नाव मझधार में थी, तूफ़ान कैसा आ गया।
तूफ़ान तो तूफ़ान था, घनघोर बादल छा गया,
देखते ही देखते बिजली की गड़गड़ाहट कानों तक आने लगी।
हवाओं का तेज़ झोंका आंधी बनकर चलने लगा,
आसमान से पानी की बूंदें लहराकर गिरने लगीं।
अब मुझे ऐसा लगे, बचना यहां मुमकिन नहीं,
देखकर ये दुख का मौसम,
अब मुझमें इतनी हिम्मत भी नहीं
कि और आगे बढ़ सकूं कहीं।
पतवार भी अब हाथों से छूट जाना चाहती है,
कुछ समझ में नहीं आता क्या करूं, क्या न करूं।
मैं तो खुद कुछ नहीं,
मासूम ज़िंदगियां मेरे साथ हैं,
अब मेरी ज़िंदगी की हर डोर
बस भगवान के हाथ है।
ये मोड़ कैसा आ गया - Hindi Kavita
ज़िंदगी में कभी-कभी ऐसे मुश्किल मोड़ आ जाते हैं, जहां इंसान को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाई नहीं देता। चारों तरफ परेशानियां, दुख और संघर्ष दिखाई देने लगते हैं। ऐसी ही परिस्थितियों को ये मोड़ कैसा आ गया इस हिंदी कविता में नाव, मझधार और तूफ़ान के माध्यम से व्यक्त किया गया है।
मझधार में फंसी नाव उस इंसान का प्रतीक है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझ रहा है। तेज़ हवाएं, घनघोर बादल और बिजली की गड़गड़ाहट उसके बढ़ते हुए संघर्ष को दर्शाते हैं। जब हिम्मत जवाब देने लगती है और पतवार भी हाथ से छूटने लगती है, तब इंसान के पास भगवान पर भरोसा करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। यह Hindi Kavita जीवन के संघर्ष, दुख, मजबूरी, जिम्मेदारी और ईश्वर पर विश्वास की भावनाओं को व्यक्त करती है।

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