मैं हद से ज़्यादा सताया गया हूँ, हर बार मोहब्बत में ही आज़माया गया हूँ। जिसे अपना समझकर सौंप दिया था दिल, उसी के हाथों सबसे ज़्यादा रुलाया गया हूँ।
उसके सर पर चढ़ी है इस क़दर बेवफ़ाई, कि वफ़ा का नाम लेते ही चिढ़ जाती है आजकल। जिसे कभी मेरी मोहब्बत पर नाज़ हुआ करता था, वही मेरी सच्चाई से नज़रें चुराती है आजकल।
वो मुझसे मोहब्बत खुलेआम करते हैं, मेरी हर बात पर अपना एतबार करते हैं। दुनिया की परवाह उन्हें ज़रा भी नहीं, वो अपने इश्क़ का हर पल इज़हार करते हैं।
मिल रही हैं निगाहें तो प्यार भी होगा, मेरी हर बात पर उन्हें ऐतबार भी होगा। यूँ ही नहीं ठहरतीं उनकी नज़रें मुझ पर, दिल में मेरे लिए कोई इज़हार भी होगा।
वो कौन-सी बात है, जो मुझसे छुपाई जा रही है, क्यों हर बार सच से नज़रें चुराई जा रही हैं। मैंने तो अपना हर राज़ तुम्हारे सामने रख दिया, फिर क्यों मुझसे कोई बात अब भी छुपाई जा रही है?
हम दोनों के बीच में बस एक ही लड़ाई है, मैं चाहता हूँ मोहब्बत, उसे अपनी ही बात मनवानी है। मैं हर बार रिश्ते को बचाने की कोशिश करता हूँ, और उसे हर बार अपनी नाराज़गी जतानी है।
हाल-ए-दिल सुनाया उन्हें तो, वो मेरी ख़ामोशी का दर्द समझ न सके। हमने अपनी मोहब्बत उनके सामने रख दी, मगर वो हमारे दिल की बात समझ न सके।
जो तेरे प्यार का सहारा मिलेगा, मेरी तन्हा ज़िंदगी को किनारा मिलेगा। तेरा हाथ थामकर चलूँ अगर उम्रभर, हर दर्द को जीने का बहाना मिलेगा। तू साथ रहे तो क्या कमी है ज़िंदगी में, तेरी मोहब्बत में मुझे अपना हर ख़्वाब दोबारा मिलेगा।
वो आजकल मुझसे फ़ासले बढ़ाने लगी है, हर बात पर मुझसे नज़रें चुराने लगी है। जिसे कभी मेरी मोहब्बत की आदत थी, वही अब धीरे-धीरे मुझसे दूर जाने लगी है।
तुम्हारी मीठी-मीठी बातें मेरे दिल को बहलाने लगी हैं, तुम्हारी हर अदा मुझे अपना बनाने लगी है। पता नहीं ये मोहब्बत है या तुम्हारा कोई जादू, तुमसे बात होते ही धड़कनें मुस्कुराने लगी हैं।
तुम्हें मुझको प्यार देना पड़ेगा, मेरे दिल का भी ख़याल करना पड़ेगा। हर बार यूँ रूठकर बात नहीं बनेगी, कभी तो मेरी मोहब्बत का एहसास करना पड़ेगा।
अच्छे-ख़ासे मूड को भी बिगाड़ देती हो, जब मेरे सवालों का उल्टा जवाब देती हो। मैं तो प्यार से बस तुमसे बात करना चाहता हूँ, फिर क्यों हर बात को तकरार का अंदाज़ देती हो?
एक बार प्यार से मेरे सवालों का जवाब दे दो, मेरे बेचैन दिल को थोड़ा-सा हिसाब दे दो। बहुत कुछ कहना है तुमसे, मगर लफ़्ज़ कम पड़ते हैं, बस एक बार अपना कहकर मुझे सुकून बेहिसाब दे दो।
वो अपने सवालों से मार देगी, बिगड़े हुए मिज़ाजों से मार देगी।
हम तो उसके इश्क़ में पहले ही घायल हैं, वो अपनी बेरुख़ी के अंदाज़ों से मार देगी।
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