1. मुलाक़ात और मोहब्बत की बात
अब तुमसे अक्सर मुलाक़ात होगी, तुम जो चाहती हो, वही बात होगी। अब दूरियों का कोई बहाना नहीं होगा, हर मुलाक़ात में बस मोहब्बत की बात होगी।
2. तुम्हारी प्यारी फ़रमाइशें
तुम्हारी फ़रमाइशें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं, हर रोज़ नई-नई ख्वाहिशें जताती जा रही हैं। हम भी तुम्हारी हर बात हँसकर मान लेते हैं, क्योंकि हमें तुम्हारी अदाएँ बहुत प्यारी लगती हैं।
3. नटखट अदाओं पर दिल हार बैठे
छोटी-छोटी बातों पर चढ़ जाती हो सीने पर, फिर रूठकर बैठ जाती हो मेरी बातों पर। तुम्हारी ये नटखट अदाएँ बड़ी प्यारी लगती हैं, इसीलिए तो दिल आता है तुम पर बार-बार।
4. तुम्हारी नाराज़गी भी प्यारी है
बात-बात पर मुँह फुलाने की ये अदा निराली है, तुम्हारी हर नाराज़गी हमें दिल से प्यारी है। रूठकर तुम मुझसे दूर न जाया करो, तुम्हारी मुस्कान पर ही ये मेरी ज़िंदगी मतवाली है
5. झगड़े में भी मोहब्बत का इशारा
नहीं मानोगी बात तो झगड़ा होगा हम दोनों के बीच में, फिर रूठोगी तुम मैं रहूँगा तुम्हारे इंतज़ार में। तुम्हारी नाराज़गी भी हमें कहाँ गवारा है, क्योंकि तुमसे झगड़ना भी मोहब्बत का इशारा है।
6. इकरार-ए-मोहब्बत
दे दो इकरार, इनकार करने की ज़रूरत क्या है, दिल में है प्यार तो छुपाने की ज़रूरत क्या है। जब धड़कनें खुद बयाँ करती हैं मोहब्बत तुम्हारी, फिर मुझसे अपने दिल की बात कहने में हिचक क्या है।
7. मोहब्बत की पनाहों में
मैं लेना चाहता हूँ तुम्हें अपनी मोहब्बत की पनाहों में, जहाँ सुकून मिले तुम्हें मेरी चाहत की बाँहों में। हर फ़िक्र से दूर रखना चाहता हूँ तुझे, बस उम्रभर सजाए रखना चाहता हूँ अपनी निगाहों में।

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