भरोसे का गुनाह शायरी | दर्द भरी हिंदी शायरी

1. हम उनके भरोसे पर बैठे थे वो हमारी नींव हिला गए जिसे अपना खुदा समझा वो हमें गुनहगार बना गए

2. वो लड़ती है झगड़ती है फिर मनाती भी है मेरी हर गलती पर हक जताती भी है गुस्से में आग लगती है उसकी बातों में पर उसी आग में मोहब्बत छुपाती भी है

3. तेरी अदाओं पर फिसल जाता हूं हर दफा खुद को संभाल पाना अब आसान नहीं रहा तेरी एक मुस्कान पर दिल हार बैठा हूं अब जितने का कोई अरमान नहीं रहा

4. मीठा मीठा बोलकर जिंदगी में जहर खोल देती है मासूम सी सूरत से हर साजिश घोल देता है हम समझते रहे हमदर्द उसको हर एक मोड़ पर वक्त आने पर वो हमारी औकात तोल देती है

5. तुम्हारी जुबान ही काफी है मुझे मिटाने को हथियार की जरूरत नहीं है दिल दुखाने को हमने हंसकर हर दर्द सह लिया तुम्हें बहाना चाहिए मुझे आजमाने को

                                 ✍️ शायर मनोज कुमार 

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