1. ये मेरी मोहब्बत धोखेबाज नहीं है जो टूट जाए चंद लम्हों में ये वो एहसास नहीं है हमने दिल से निभाया हर रिश्ता ये खेल नहीं सच्चा जज्बात है कोई मजाक नहीं है।
1. दिल लगाने की कोशिश की थी मैंने हर दफा टूटा हूं उसकी खता से अब इश्क नहीं खुद से वादा किया है मर जाएंगे लौटेंगे नहीं आंखें खुल गई है उसकी दगा से।
3. इश्क करो तो जरा संभल कर किया करो ये दिल का खेल है इसे हल्के में ना लिया करो कहीं नाराजगी में लफ्ज़ बदल ना जाए जो जान कहते थे कहीं अजनबी में बन जाए
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