सुबह का हर लम्हा हसीन हो जाता है तुम्हारी प्यारी-सी मुस्कान से, दिल को सुकून मिल जाता है तुम्हारी एक मीठी-सी बात से। यूँ तो रोज़ सूरज निकलता है रोशनी लेकर आसमान से, मगर मेरी सुबह ख़ास हो जाती है तुम्हारे दीदार से। Good Morning
अपनी ख्वाहिशों को अधूरा कब तक यूं ही जलाएंगे हर साल झूठी उम्मीदों में कब तक खुद को बहलाएंगे जब किस्मत में कोई महबूबा लिखी ही नहीं है तो बताओ इस दिल के जख्मों के साथ कैसे वैलेंटाइन डे मनाएंगे।
कभी गुलाब खुद खरीदे कभी चॉकलेट खुद ही खाए हैं आईने में देखकर जान कहे और मुस्कुराए हैं जब मुकद्दर में मोहब्बत लिखी ही नहीं है तो ये इश्क का त्योहार क्या मानेंगे।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें