हिंदी शायरी संग्रह | लव, दर्द और रोमांटिक शायरी

अपनी ख्वाहिशों को अधूरा कब तक यूं ही जलाएंगे हर साल झूठी उम्मीदों में कब तक खुद को बहलाएंगे जब किस्मत में कोई महबूबा लिखी ही नहीं है तो बताओ इस दिल के जख्मों के साथ कैसे वैलेंटाइन डे मनाएंगे।

कभी गुलाब खुद खरीदे कभी चॉकलेट खुद ही खाए हैं आईने में देखकर जान कहे और मुस्कुराए हैं जब मुकद्दर में मोहब्बत लिखी ही नहीं है तो ये इश्क का त्योहार क्या मानेंगे।

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