 |
| Shayar Manoj Kumar |
1. वो आंखों से मस्तियां करने लगी है मैं दीदार में खोने लगा हूं हर लम्हा उसी का हुए जा रहा हूं अब तो हर मंजर से सुकून की आहट मिलने लगी है।
2. इश्क के सच्चे जज्बातों में मैं, मरने लगा हूं मैं मेरी जान, तेरी हर एक मुस्कान पर बिखरने लगा हूं मैं मेरी जान।
एक टिप्पणी भेजें